जोड़ों के दर्द से अब पाएं राहत

जोड़ों के दर्द से अब पाएं राहत

जोड़ों का दर्द आज एक गंभीर रोग के रूप में सामने आ रहा है। पहले जोड़ों के दर्द को उम्रदराज लोगों में होने वाली परेशानी समझा जाता था लेकिन आज यह रोग युवाओं को भी अपनी जकड़ में ले रहा है। कारण यह है कि आज युवा आधुनिक जीवनशैली को तरजीह देने लगे हैं और अपने करियर को संवारने के दबाव के चलते युवावस्था में आवश्यक व्यायाम करने की ओर ध्यान नहीं दे रहे। नतीजा, कम उम्र में ही उन्हें जोड़ों के दर्द की परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं अब बदलते मौसम का दौर चल रहा है और जल्द ही सर्दी का सीजन शुरू हो जायेगा। इस मौसम में जोड़ों के दर्द और भी बढ़ जाता है। आइये जानते हैं क्यों होता है जोड़ों का दर्द, बदलते मौसम में क्यों बढ़ जाती है परेशानी और कैसे पायें राहत…

शरीर में किसी भी रोग का घर कर लेना तभी संभव होता है जब हमारा शरीर उस रोग का विरोध न कर पाये। जोड़ों का दर्द भी कुछ इसी तरह से हमारे शरीर पर हावी होता है। कैल्शियम, विटामिन डी का पर्याप्त मात्रा में सेवन और नियमित व्यायाम हमारे शरीर की हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत रखते हैं। उर्म्रदराज लोगों की पाचन शक्ति कम हो जाने के कारण कैल्शियम और विटामिन डी की कमी हो जाती है। वहीं एक उम्र के बाद वह व्यायाम करना भी छोड़ देते हैं। ऐसे में जोड़ों के दर्द का उनपर हावी हो जाना सामान्य है। लेकिन आज के युवा आधुनिक जीवनशैली के चलते मैदा से निर्मित खाद्य पदार्थों, फास्ट फूड, जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक आदि का अत्याधिक सेवन करते हैं। इससे शरीर को पौष्टिक भोजन नहीं मिलता और शरीर की रोग प्रतिरोधक झमता भी कम हो जाती है। वहीं शराब, धूम्रपान हड्ड्यिं और मांसपेशियों को नुकसान पहुंचाते हैं। व्यायाम से उनकी दूरी उनको अच्छे स्वास्थ से भी दूर कर देती है। इसका नतीजा उन्हें जोड़ों के दर्द के रूप में भुगतना पड़ता है।

मौसम बदलने के साथ ही जोड़ों का दर्द भी बढ़ने लगता है। खासकर सर्दी के मौसम में हमारी रक्त नलियां सिकुड़ जाती हैं जिसके कारण रक्त संचार बाधित होता है। ऐसे में जोड़ों का दर्द तकलीफदेह हो जाता है।

जोड़ों का दर्द आपको तकलीफ न दे इसके लिये कुछ उपाय करना बेहद जरूरी है। अधिक वजन जोड़ों को प्रभावित करता है खासकर घुटने को। ऐसे में जरूरी है कि आप खान-पान पर नियंत्रण और नियमित व्यायाम कर अपने वजन को संतुलित रखें। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठकर कार्य न करें, बल्कि हर आधे घंटे के खडे“ होकर थोड़ा टहलें। याद रखें हमारी मजबूत मांसपेशियां जोड़ों को संगठित रखती हैं ऐसे में उन्हें गतिमान और मजबूत रखना बेहद आवश्यक है। मांसपेशियों को मजबूत रखने के लिये विटामिन डी की उपयुक्त मात्रा लेनी चाहिये। सूरज की रोशनी विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत है। डेयरी उत्पाद और कई अनाज, सोया दूध और बादाम के दूध में भी विटामिन डी प्रचुर मात्रा में होता है। खान-पान पर नियंत्रण रखें और फास्ट फूड, जंक फूड, अल्कोहल, धूम्रपान, तंबाकू, अधिक चाय-काफी या कोल्ड ड्रिंक का सेवन न करें। अपने भोजन में कैल्शियम वाले खाद्य पदार्थ जैसे दूध, दही, ब्रोकली, हरी पत्तेदार सब्जी, कमल स्टेम, तिल के बीज, अंजीर और सोया या बादाम दूध आदि को अवश्य शामिल करें।

ऊपर दिये गये उपायों से आप जोड़ों के दर्द से राहत पा सकते हैं। लेकिन यदि दर्द असहनीय हो जाये तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। जोड़ों के दर्द में आयुर्वेदिक उपचार बेहद कारगर होता है। औषधीय जड़ी-बूटियों से निर्मित आयुर्वेदिक दवाएं शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाती और वह एलोपैथिक दवाओं के मुकाबले बेहद सस्ती होती हैं। लेकिन ध्यान रहे, जोड़ों के दर्द में विशेषज्ञ आयुर्वेद चिकित्सक से ही परामर्श लें और अच्छी कंपनी द्वारा निर्मित दवा का ही सेवन करें। क्योंकि कहा भी गया है ‘नीम-हकीम, खतरा-ए-जान। गलत उपचार आपके जोड़ों को और अधिक नुकसान पहुंचा सकता है।