कैसे करें पाइल्स का सही इलाज

कैसे करें पाइल्स का सही इलाज

पाइल्स को हम अर्श/बवासीर/मूलव्याधि के नाम से भी जानते हैं जो आज एक गंभीर बीमारी के रूप में सामने आ रहा है। बेहद तकलीफदेह यह रोग जीवनचर्या को भी प्रभावित करता है। लगभग 70 प्रतिशत लोग कभी न कभी पाइल्स के रोग का सामना करते हैं। उम्र बढ़ने के साथ पाइल्स होने की संभावना भी बढ़ जाती है। यह रोग जितना दर्द देता है गलत तरीके से किया गया उपचार उससे भी अधिक तकलीफ देता है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि कैसे करें पाइल्स का सही इलाज। आइये जानते हैं पाइल्स होने के कारण, लक्षण और उसके उपचार का सही तरीका…

क्या है पाइल्स का रोग

पाइल्स में गुदा के अंदर और बाहर या किसी एक जगह मस्से जैसी स्थिति बन जाती है, जो कभी अंदर रहते हैं और कभी बाहर भी आ जाते हैं। ये मस्से मलत्याग के समय बड़ी तकलीफ देते हैं। इन मस्सों में से कई बार खून निकलता है और दर्द भी होता है। कभी-कभी जोर लगाने पर ये मस्से बाहर की ओर आ जाते हैं। वहीं मलत्याग के बाद पेट साफ न होने का अहसास नहीं होता, लम्बे समय तक कब्ज बनी रहती है।

पाइल्स के कारण

फास्ट फूड, जंक फूड, ऑयली फूड का अधिक सेवन, अधिक बैठकर या देर रात तक जागकर कार्य करना, पुरानी कब्ज होना, व्यायाम न करना पाइल्स के रोग का प्रमुख कारण हैं। वहीं अनुवांशिक कारणों और गुर्दो की बीमारी के कारण भी बवासीर हो सकती है।

पाइल्स का कैसे करें सही उपचार

पाइल्स होने के बाद उसका उपचार भी बेहद बड़ी समस्या के रूप में सामने आता है। एक बार पाइल्स हो जाने के बाद खान-पान और अपनी जीवनशैली पर नियंत्रण कर उसको आगे बढ़ने से तो रोका जा सकता है किंतू पूर्ण रूप से उसको खत्म करना मुश्किल होता है। वहीं विज्ञापन-प्रचार के माध्यम से लोगों को भ्रमित करने वाले नीम-हकीम पाइल्स को जड़ से खत्म करने का खोखला दावा करते हैं। रोगी इनसे उपचार कराकर अपनी गाढ़ी कमाई तो गंवाता ही है साथ ही गलत इलाज होने के कारण पाइल्स गभीर रूप भी ले लेती है। ऐसे में पाइल्स हो जाने के बाद उसका विशेषज्ञ चिकित्सक से ही इलाज करायें। एलोपैथिक दवाओं जो बेहद महंगी होती हैं उनसे पाइल्स के दर्द में राहत तो मिलती है। लेकिन इन दवाओं का सेवन रोकने के बाद पाइल्स के फिर से हावी होने की संभावना रहती है। वहीं एलोपैथिक दवाओं से होने वाला साइड इफेक्ट शरीर को नुकसान भी पहुंचाता है।

कई बार परेशान होकर मरीज पाइल्स से निजात पाने के लिये सर्जरी करा लेता है। किंतू महंगे उपचार और लंबे समय तक बिस्तर पर आराम करने के बावजूद यह रोग जड़ से खत्म नहीं होता। वहीं घरेलू उपचार से भी पाइल्स में लाभ मिलने की संभावना कम ही होती है।

आयुर्वेद का उपचार पाइल्स के रोग के रोग को जड़ से समाप्त करता है जिससे उसके फिर से होने की संभावना भी न के समान होती है। महंगी एलोपैथिक दवाओं और सर्जरी के मुकाबले आयुर्वेदिक चिकित्सा बेहद कम खर्च वाली होती है। वहीं औषधीय जड़ी-बूटियों से बनी आयुर्वेदिक दवाएं शरीर पर किसी प्रकार का साइड इफेक्ट भी नहीं डालती। लेकिन ध्यान रखें कि आयुर्वेद का उपचार भी तभी कारगर होता है जब इलाज करने वाला चिकित्सक और उसके द्वारा दी गयीं दवाएं भी अच्छी हों। अतरू पाइल्स होने पर योग्य आयुर्वेद चिकित्सक से ही उपचार करायें और पाइल्स की समस्या से हमेशा के लिये निजात पायें…